आज सावन के दूसरे सोमवार पर महादेव को प्रसन करने के उपाय, जीवन में भर जाएंगी खुशियां

हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। वैसे तो पूरे सालभर सोमवार के दिन शिव जी की पूजा की जाती है, लेकिन सावन माह में सोमवार का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

भगवान शिव को सभी देवों में सबसे उच्च स्थान प्राप्त है, इसलिए वे देवाधिदेव महादेव कहलाते हैं। वे कालों के भी काल महाकाल हैं इनकी कृपा से बड़ा से बड़ा संकट भी टल जाता है। भगवान शिव को मनुष्य तो क्या देवी-देवता, सुर-असुर, सभी पूजते हैं। सावन में सोमवार के दिन व्रत रखने से भगवान शिव के साथ माता पार्वती का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

आज यानी 25 जुलाई को सावन माह का दूसरा सोमवार है। आज के दिन व्रत रखना और शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत शुभ फलदायी होता है। साथ ही आज ही के दिन प्रदोष तिथि के अलावा अन्य कई शुभ योग बन रहे हैं। ऐसे में ये दिन शिव जी पूजा और उपाय के लिए सर्वश्रेष्ठ है। ज्योतिष में कुछ उपाय भी बताए गए हैं, जिन्हें इस दिन करने से सुख समृद्धि आती है। आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में…  
सावन के दूसरे सोमवार पर करें ये उपाय
खीर का लगाएं भोग
सावन के दूसरे सोमवार को गाय के दूध से बनी खीर का भोग भगवान शिव और माता पार्वती को लगाएं। बाद में प्रसाद के रूप में इसे खुद भी खाएं। ऐसा करने से पारिवारिक जीवन की परेशानियां हैं दूर हो जाएंगी। 
धन हानि से बचने के लिए उपाय
यदि बार-बार बिजनेस में नुकसान हो रहा है, तो सावन सोमवार को शिवलिंग का अभिषेक अनार के रस से करें। मान्यता है कि इससे पैसों से संबंधित हर परेशानी दूर हो सकती है। 
वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए उपाय
ज्योतिष के अनुसार, पति-पत्नी के बीच मिठास और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए शिव जी और मां पार्वती का पंचामृत से अभिषेक करें। मान्यता है कि ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच का क्लेश कम होगा। 
बीमारी दूर करने के लिए उपाय 
यदि आप या आपके परिवार में कोई लंबे समय से बीमार है, तो इस सावन के दूसरे सोमवार को पानी में काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। मान्यता है कि इससे रोगों में आराम मिलेगा। 
घर का वास्तु दोष हो जाएगा दूर
यदि घर में कलह जैसा माहौल बना रहता है, तो इसका कारण वास्तु दोष भी हो सकता है। इसके लिए आप सावन के सोमवार को घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और नियमित इसकी पूजा करें। 
साथ ही सावन सोमवार के दिन व्रत रखते हुए शिव चालीसा का पाठ करना भी शुभ फलदायी होता है।
॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥
 
॥ चौपाई ॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला।सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके।कानन कुण्डल नागफनी के॥

 गौर शिर गंग बहाये।मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई।अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई।नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी।करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं।जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई।निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
 
॥ दोहा ॥

नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।
स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥

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