अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की चुनौती से भागे बागेश्वर सरकार धीरेंद्र शास्त्री, समिति ने की एफआईआर और गिरफ्तार करने की मांग

नागपुर। अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का आरोप है कि दिव्यशक्ति का दावा करने वाले बागेश्वर सरकार के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र कृष्ण महाराज समिति की चुनौती न स्वीकारते हुए नागपुर से चले गए। समिति ने महाराज के खिलाफ जादू-टोना विरोधी कानून के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर मध्य प्रदेश में जाकर उन्हें गिरफ्तार करने और दिव्य दरबार के आयोजकों पर कार्रवाई करने की मांग पुलिस से की है, अन्यथा आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने की चेतावनी दी है।

दूसरी तरफ इस मामले में आयोजन समिति का कहना है कि कथा में अंधश्रद्धा जैसी कोई भी बात नहीं हुई। बागेश्वर सरकार ने कभी भी घोषणा नहीं की कि वे कोई चमत्कार करते हैं। दरबार में जो भी होता है वह सब कुछ सामान्य तरीके से होता है। कैंसर हॉस्पिटल से संबंधित जरूरी मीटिंग में शामिल होने के लिए उन्हें दो दिन पहले कथा का समापन करना पड़ा। महाराजजी के नागपुर आने के बाद यह तय हुआ था कि 11 जनवरी तक ही कथा होगी। पोस्टर पहले छप गए थे। रायपुर की कथा में भी दो दिन कम किए हैं।

दिव्य दरबार में जो हुआ उस पर उठाए सवाल: महाराष्ट्र सरकार की जादू-टोना विरोधी कानून प्रचार-प्रसार कार्यक्रम अमल समिति के सहअध्यक्ष व अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक-राष्ट्रीय संगठक प्रा. श्याम मानव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संविधान के अनुसार रामकथा या धर्म का प्रचार-प्रसार करने का सभी को अधिकार है, लेकिन धीरेंद्र कृष्ण महाराज ने नागपुर के रेशमबाग मैदान में 7 और 8 जनवरी को आयोजित दिव्य दरबार में चमत्कारी दावे कर कानून का उल्लंघन किया है। वीडियो के साथ सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) रोशन पंडित तथा पुलिस आयुक्त से शिकायत की है।

वीडियो में महाराज कह रहे हैं-भूत बाधा की सवारी आती है, उपद्रव किया गया है, गंदी तांत्रिक क्रिया है’, तबियत ठीक नहीं रहती, तत्काल मृत्यु, अभी तक घर में 5 मृत्यु हुई है पितृदोष के कारण…’ ‘आपके पिता का नाम शंकरलाल है। माइक से बोले या सब नहीं तो हम तुम्हारे सारे कांड खोल देंगे।’ मानव ने कहा कि 9 जनवरी को समिति ने महाराज को नाम, आयु, मोबाइल बताने, दूसरे रूम में रखी 10 वस्तुओं की पहचान करने और वीडियो के अनुसार दिव्यशक्ति के दावे साबित कर 30 लाख रुपए जीतने की चुनौती दी थी, लेकिन महाराज ने चुनौती स्वीकार नहीं की। महाराज की रामकथा 13 जनवरी तक होने वाली थी, लेकिन दो दिन पूर्व 11 जनवरी की शाम को ही महाराज नागपुर से चले गए। इसकी भनक लगने पर 10 जनवरी और 11 जनवरी को भी सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) से शिकायत की थी।

समिति पर भी उठे सवाल : पत्रकारवार्ता में पत्रकारों ने समिति पर भी सवाल उठाए। महाराष्ट्र सरकार की जादू-टोना विरोधी कानून प्रचार-प्रसार कार्यक्रम अमल समिति के अध्यक्ष महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री है और श्याम मानव सहअध्यक्ष हैं। उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जादू-टोना विरोधी कानून के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समिति के सहअध्यक्ष श्याम मानव के अनुसार सामाजिक न्याय विभाग का प्रभार फिलहाल मुख्यमंत्री के पास है। संबंधित विभाग का मंत्री ही समिति का अध्यक्ष होता है।

नौ विभाग के सचिव भी इसमें शामिल हैं, जबकि बागेश्वर सरकार की कथा में देवेंद्र फडणवीस, नितीन गडकरी जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। ऐसे में समिति पर भी पत्रकारों ने सवाल उठाए। एक तरफ समिति के पदाधिकारी आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार के जिम्मेदार लोग कथा में जाकर उसका समर्थन कर हैं। इसका जवाब समिति के पास नहीं था। वहीं कथा की आयोजन समिति का आरोप है कि अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के पदाधिकारी सस्ती लोकप्रियता के लिए यह सब स्टंट कर रहे हैं।

19 को भंडाफोड़ सभा : उन्होंने बागेश्वर सरकार का भंडाफोड़ करने के लिए 19 जनवरी को समिति द्वारा सभा का आयोजन आग्याराम देवी चौक स्थित गुरुदेव सेवाश्रम में किया गया है। जरूरत पड़ने पर समिति अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी और सड़क पर उतर कर आंदोलन भी करेगी।

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