हिमाचल में पिछले साल की अपेक्षा 50% कम सेब: अब तक मात्र 1.8 करोड़ बॉक्स मंडियों में भेजा; 1.75 करोड़ पेटी में सिमटेगा सीजन

हिमाचल में पिछले साल की अपेक्षा 50% कम सेब: अब तक मात्र 1.8 करोड़ बॉक्स मंडियों में भेजा; 1.75 करोड़ पेटी में सिमटेगा सीजन


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देवेंद्र हेटा, शिमला15 घंटे पहले

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हिमाचल प्रदेश से 1 करोड़ 8 लाख 907 पेटी सेब देश की मंडियों को भेजा जा चुका है। इन दिनों 7500 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों का सेब मंडियों में आ रहा है। लगभग 75 फीसदी सेब सीजन खत्म हो गया है। ऐसे में इस बार का MIS के तहत खरीदे जाने वाले सेब को मिलाकर डेढ़ से पौने 2 करोड़ पेटी के बीच सीजन सिमट सकता है।

यह आज तक की दूसरी सबसे कम और बीते साल की अपेक्षा 50 फीसदी फसल होगी। साल 2022 में 3.36 करोड़ पेटी सेब हुआ था। इस बार उत्पादन आधा रहने से बागवानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।

MIS में भी 25284.63 मीट्रिक टन सेब खरीदा
MIS यानी मंडी मध्यस्थता योजना के तहत भी इस बार अब तक मात्र 25284.63 मीट्रिक टन सेब की खरीद हो पाई है। बीते साल पूरे सीजन में 72 हजार मीट्रिक टन सेब MIS के तहत खरीदा गया था। इस बार MIS के तहत मुश्किल से 35 से 40 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद हो पाएगी।

पेटी में कम सेब भरने के बावजूद दो करोड़ बॉक्स नहीं
पिछले सीजन तक बागवान प्रति पेटी 30 से 40 किलो सेब भर रहे थे। इस बार सरकार ने 24 किलो की शर्त लगाई थी। 30 से 40 किलो सेब भरने से जहां पहले 100 पेटी होती थी, वहां 20 से 25 किलो सेब भरने से इस बार 115 से 120 पेटी सेब हुआ है। प्रति पेटी कम सेब के बावजूद इस बार उत्पादन दो करोड़ पेटी का आंकड़ा छूते नजर नहीं आ रहा।

सीजन शुरू होने से पहले दो करोड़ पेटी का था अनुमान
बागवानी विभाग ने मई महीने में सवा दो करोड़ पेटी और जून महीने में दो करोड़ पेटी सेब होने का आकलन लगाया था। मगर, इस बार विभाग के आकलन से 25 लाख से 40 लाख पेटी सेब कम हो सकता है।

सेब उत्पादन में गिरावट के अहम कारण
सेब उत्पादन में गिरावट की ‌अलग-अलग वजह है। सर्दियों में इस बार बर्फ न के बराबर गिरी है। इससे कई क्षेत्रों में सेब की पुरानी किस्मों की चिलिंग पूरी नहीं हो पाई। मार्च में जब फ्लावरिंग शुरू हुई तो बारिश-बर्फबारी शुरू हो गई। इससे गर्म मौसम की जगह कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई।

अप्रैल और मई महीने में बार बार ओलावृष्टि ने सेब बागवानों की कमर तोड़ी। अप्रैल से जून महीने तक जब धूप की जरूरत थी, इस बार न के बराबर धूप खिली। जुलाई में भी बारिश होती रही। इससे बगीचों में जरूरत से ज्यादा नमी हो गई। इस वजह से सेब बगीचों में अर्ली लीव-फॉल शुरू हो गया।

कई क्षेत्रों में 80 से 90 फीसदी तक पत्तियां झड़ गई है। इस वजह से साइज भी नहीं बन पाया। इससे उत्पादन में ज्यादा गिरावट दर्द की गई है। छोटे आकार के सेब के बागवानों को दाम भी अच्छे नहीं मिल पाए है। इससे बागवानों को इस बार करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।

सेब के अधीन क्षेत्र में इजाफा, फसल में कमी चिंताजनक
हिमाचल प्रदेश में सेब के अधीन क्षेत्र में बढ़ोतरी के बावजूद उत्पादन में गिरावट चिंताजनक है। प्रदेश में साल 2010 में बंपर क्रॉप 5.11 करोड़ पेटी हुई थी। इसके बाद कभी भी इतना सेब उत्पादन नहीं हुआ। साल 2011 में सबसे कम 1.38 करोड़ पेटी सेब हुआ था। इस बार भी लगभग 2011 के आसपास ही उत्पादन सिमटने की संभावना है।

1.08 लाख पेटी सेब मंडियों में भेजा
हिमाचल बागवानी विभाग के जॉइंट डायरेक्टर हेमचंद ने बताया कि इस बार पिछले साल की अपेक्षा कम फसल है। मौसम अनुकूल नहीं रहने से उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। अब तक 1.08 लाख पेटी सेब देश की मंडियों में भेजा जा चुका है।

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