हिमाचल में दुनिया का इकलौता नागलोक मंदिर बना: सोलन के ‘रामलोक’ में 8 कुल 26 जातियों-प्रजातियों के सर्पों समेत महारानी शेषनाग माता की मूर्ति स्थापित

हिमाचल में दुनिया का इकलौता नागलोक मंदिर बना: सोलन के ‘रामलोक’ में 8 कुल 26 जातियों-प्रजातियों के सर्पों समेत महारानी शेषनाग माता की मूर्ति स्थापित


सोलन/शिमला10 घंटे पहले

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रामलोक मंदिर बना भव्य नागलोक मंदिर, जहां नागलोक की महारानी शेषनाग माता की मूर्ति भी स्थापित है।

हिमाचल प्रदेश में शक्तिपीठों और प्राचीन एवं भव्य मंदिरों की कड़ी में एक और ऐतिहासिक मंदिर जुड़ने जा रहा है। सोलन जिले के साधुपुल में स्थापित रामलोक मंदिर के परिसर में विश्व का इकलौता नागलोक मंदिर बनकर तैयार है। यह दुनिया का पहला नागलोक मंदिर है।

नागलोक मंदिर में नागों के 8 कुल, 26 जातियों और समस्त प्रजातियों के सर्पों सहित नाग कुल की महारानी शेषनाग माता की मूर्ति विशेष तौर पर स्थापित की गई है। विशेष बात यह है कि नागलोक मंदिर की स्थापना के लिए कलयुग में पहली बार सर्प महायज्ञ का आयोजन करवाया जा रहा है, जो 16 अगस्त से शुरू हुआ था और अब 25 अगस्त तक चलेगा।

रामलोक मंदिर के संचालक स्वामी अमरदेव ने दावा किया कि इस यज्ञ में सर्पराज तक्षक ने स्वयं आकर दर्शन दिए हैं। उन्होंने बताया कि नागलोक में जिस स्थान पर सर्पराज तक्षक की मूर्ति स्थापित की गई है, यज्ञ शुरू होने पर वहां स्वयं नागराज प्रकट हुए। यह लगभग 8 फीट लंबे नाग थे, जिन्होंने काफी देर वहां रहकर सर्प महायज्ञ के लिए आशीर्वाद दिया।

सोलन स्थित रामलोक मंदिर, जिसके अंदर नागलोक मंदिर बनाया गया है।

सोलन स्थित रामलोक मंदिर, जिसके अंदर नागलोक मंदिर बनाया गया है।

राजा जन्मेजय ने करवाया था सर्प महायज्ञ
स्वामी अमरदेव बताते हैं कि इससे पहले सर्प महायज्ञ द्वापर युग के दौरान पांडव वंशी महाराज परीक्षित के पुत्र राजा जन्मेजय ने करवाया था। महाराज परीक्षित को साधु के श्राप के चलते सर्पराज तक्षक ने काट लिया था, जिसके बाद राजा जन्मेजय ने यह यज्ञ करवाया था। उन्होंने बताया कि अब नागलोक की स्थापना के लिए कलयुग में पहली बार इस यज्ञ का आयोजन करवाया जा रहा है। स्थापना के बाद मंदिर सोमवार, गुरुवार और शनिवार को खुला करेगा।

30 फीट गहरे तहखाने में जमा होगा खजाना
नागलोक मंदिर में 30 फीट गहरा एक तहखाना बनाया गया है, जिसकी दीवारें 5 फीट मोटी हैं और यह कभी नहीं खुलेगा। मंदिर में अपने कष्टों के निवारण के लिए आने वाले लोग सोने-चांदी के सर्पों सहित अन्य विशेष चढ़ावे को तहखाने में जमा करेंगे। बताया जाता है प्रदेश में जब कोई बड़ा संकट आएगा तो अपने आप इस तहखाने के दरवाजे खुलेंगे और इसमें संचित खजाने को जनहित में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

नागलोक मंदिर में चल रहा सर्प महायज्ञ।

नागलोक मंदिर में चल रहा सर्प महायज्ञ।

160 साल पहले केरल के त्रावणकोर में भी बनना था नागलोक
भारत के दक्षिणी क्षेत्र केरल में 162 वर्ष पहले त्रावणकोर रियासत में राजा देव वर्मन ने नागलोक मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया था। अचानक उनकी मृत्यु हो गई, जिस कारण यह कार्य अधूरा रह गया। अब यह पद्मनाभ स्वामी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

स्वामी ने बताया साधुपुल के साथ ही पद्मनाभ स्वामी मंदिर में भी ऐसा ही सर्प महायज्ञ करवाया जा रहा है, क्योंकि नागलोक की स्थापना का संकल्प सबसे पहले वहीं पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि दोनों मंदिरों में 25 अगस्त को एक साथ पूर्णाहूति डाली जाएगी।

राम लोक मंदिर में स्थापित राम परिवार और हनुमान जी की प्रतिमा।

राम लोक मंदिर में स्थापित राम परिवार और हनुमान जी की प्रतिमा।

सवा करोड़ ईंटों से निर्मित 451 फीट ऊंचा रामलोक मंदिर
शिमला नेशनल हाईवे पर सोलन के कंडाघाट से चायल रोड पर बना रामलोक मंदिर सवा करोड़ ईंटों से निर्मित हुआ है, जिसकी ऊंचाई 451 फीट है। रामलोक मंदिर परिसर में भव्य राम परिवार स्थापित किया गया है, जिसमें प्रभु राम सहित माता-सीता, हनुमान जी और अन्यों की अष्टधातु से बनी 11-11 फीट ऊंची मूर्तियां स्थापित हैं। इसके अलावा यहां पर गणपति महाराज की विशाल मूर्ति, 450 किलो वजनी शिवलिंग के साथ नवगृह मंदिर, देवदार के वृक्षों पर स्थापित सप्तर्षि के मंदिर लोगों की आस्था के विशेष केंद्र हैं।

सर्प महायज्ञ के समापन पर सोनिया गांधी को निमंत्रण
रामलोक मंदिर में सर्प महायज्ञ के समापन अवसर पर 25 अगस्त को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के विशेष तौर पर आने की संभावना है। मंदिर के संचालक स्वामी अमरदेव ने बताया कि दिल्ली से उनके आने की मंजूरी मिल गई है। इस अवसर पर सोनिया गांधी के अलावा उनके साथ कांग्रेस के अन्य बड़े नेता भी पहुंचेंगे। सर्प महायज्ञ में हिमाचल सहित दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न राज्यों से कांग्रेस-भाजपा नेताओं के अलावा अन्य क्षेत्रों के दिग्गज लोग भी शामिल होंगे।

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