हिमाचल में अदाणी का बागवानों ने किया बायकॉट: तीनों CA स्टोर खाली; अब तक 400MT सेब मिला, जबकि क्षमता 25 हजार MT की

हिमाचल में अदाणी का बागवानों ने किया बायकॉट: तीनों CA स्टोर खाली; अब तक 400MT सेब मिला, जबकि क्षमता 25 हजार MT की


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शिमलाएक घंटा पहले

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हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों ने अदाणी से मुंह मोड़ लिया है। अदाणी ग्रुप हिमाचल में 14-15 साल से सेब कारोबार कर रहा है। यह पहला मौका है, जब अदाणी को उसके तीन CA स्टोर की कुल क्षमता का अब तक 2 प्रतिशत सेब भी नहीं मिल पाया है। इसकी वजह सेब की कम फसल के साथ-साथ 95% से भी ज्यादा बागवानों द्वारा अदाणी का बायकॉट करना है।

अदाणी ग्रुप से जुड़े सूत्रों की माने तो पांच सितंबर तक तीनों स्टोर पर लगभग 400 मीट्रिक टन सेब मिल पाया है, जबकि अदाणी के रामपुर के बिथल, रोहड़ू और ठियोग के सैंज CA स्टोर में 25 हजार मीट्रिक टन सेब रखने की क्षमता है। बीते साल तीनों स्टोर पूरी तरह भरे थे। मगर, अभी 2 प्रतिशत चैंबर भी पूरे नहीं भरे।

अदाणी पर मार्केट रेट गिराने की साजिश के आरोप

दरअसल, अदाणी समूह पर सेब बागवान सेब के मार्केट रेट गिराने के आरोप लगाते रहे हैं। पिछले चार-पांच सालों से अदाणी ने जब भी सेब के रेट ओपन किए है, उसके चार-पांच दिन के भीतर ही सेब के बाजार भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस बार भी अदाणी ने अगस्त के आखिरी सप्ताह में रेट ओपन किए।

जिस दिन अदाणी ने सेब के रेट दिए, उस दिन तक हिमाचल की मंडियों में प्रीमियम सेब 140 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा था। बावजूद इसके अदाणी ने अधिकतम 96 रुपए का रेट ओपन किया। इसके बाद बागवानों ने अदाणी का जबरदस्त विरोध किया। तब जाकर अदाणी ने दो बार सेब खरीद के रेट जरूर बढ़ाए। मगर, अभी भी अदाणी के रेट प्रदेश की मंडियों के बराबर नहीं है।

इसलिए विरोध कर रहे बागवान: बिष्ट

प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि हिमाचल की मंडियों में अभी भी प्रीमियम सेब 120 से 130 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है, जबकि अदाणी अधिकतम 110 रुपए प्रति किलो के हिसाब से सेब खरीद रहा है।

यही वजह है कि बागवान चार-पांच सालों से अदाणी का विरोध कर रहे है। बीते साल भी बागवानों ने लंबी लड़ाई इनके खिलाफ सड़कों पर लड़ी है। अब भी बागवान निजी घरानों के कारोबार के लिए कायदे-कानून तय करने की मांग कर रहे है।

बागवान होने लगा संगठित: चौहान

संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि बागवान बार-बार अदाणी के शोषण को रोकने की मांग कर रहे है। उनकी मांग पर बीते साल हाई पावर कमेटी जरूर बनी, लेकिन इनकी रिपोर्ट पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि अदाणी सहित दूसरे निजी घरानों के कारोबार के लिए पॉलिसी बनाई जाए, ताकि बागवानों से होने वाली लूट-घसूट को रोका जाए।

सभी निजी घराने माप-तोल, कलर, प्रेशर के नाम पर मोटी लूट करते है। उन्होंने बताया कि बागवान धीरे-धीरे संगठित होने लगा है और उनके साथ होने वाली लूट का जवाब बाय​​​​​​​कॉट करके जवाब दे रहा है। यही वजह है कि अदाणी को इस बार सेब नहीं मिल रहा।​​​​​



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