सिरमौर में लहसुन की फसल हुई ‘बीमार’: बेसल रोट की चपेट में आई, कई किसानों ने बर्बाद की हल चलाकर, अदरक भी हुआ था खराब

सिरमौर में लहसुन की फसल हुई ‘बीमार’: बेसल रोट की चपेट में आई, कई किसानों ने बर्बाद की हल चलाकर, अदरक भी हुआ था खराब

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हरिपुरधारएक घंटा पहले

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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में लहसुन की फसल इस वर्ष भी बेसल रोट नामक बीमारी की चपेट में आ गई है। अदरक के बाद इस प्रमुख फसल के भी बीमारी की चपेट में आने से क्षेत्र के किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है।

फसल के बीमारी की गिरफ्त में आने से क्षेत्र के कई किसान लहसुन की फसल पर हल चलाने के लिए विवश हो गए हैं। इसके कारण किसानों को मुनाफा मिलना तो दूर की बात बीज, खाद और गोबर के लिए किसानों ने जो पैसे खर्च किए थे, वह भी बर्बाद हो गए हैं।

गिरिपार की प्रमुख नकदी फसल लहसुन
गिरिपार क्षेत्र में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लहसुन क्षेत्र के लोगों की प्रमुख नकदी फसल है। लहसुन उत्पादन में सिरमौर प्रदेश में नंबर एक पर है, जबकि कुल्लू दूसरे नंबर पर है। सिरमौर जिले के हरिपुरधार, नौहराधार शिलाई, संगड़ाह, राजगढ़ आदि में हजारों मीट्रिक टन लहसुन का उत्पादन होता है।

फसल की जड़ में लग रहा कीड़ा
पिछले 3 से 4 साल से लहसुन की फसल बीमारी से खराब हो रही है। किसानों ने दवाओं का छिड़काव भी किया, लेकिन बीमारी नियंत्रित नहीं हो रही है। लहसुन के पत्ते पीले होते जा रहे हैं और जड़ों में कीड़े लग रहे हैं।

फसल चक्र का रखें ध्यान
बागवानी एवं वाणिक विश्वविद्यालय सोलन के विशेषज्ञ डॉक्टर डॉक्टर संदीप बंसल ने बताया की किसान अपने खेतों में बार एक फसल की बुआई कर रहे हैं। इससे फसल चक्र टूट रहा है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि लहसुन की फसल को छोटी-छोटी क्यारियों में लगाएं। इससे फसल के बीमारी की चपेट में आने की कम संभावनाएं रहती हैं।

डॉक्टर बंसल ने किसानों को सलाह दी कि 3 वर्षों के बाद बीज को बदलना जरूरी है। इसके अलावा बीज का ट्रीटमेंट भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि फसल को बीमारी से बचाने के लिए ट्रेचिंग भी जरूरी है।

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