शिमला में देवदार के पेड़ काटने पर विवाद: बारिश में गिरने से हुआ था काफी नुकसान; ‘चिपको आंदोलन’ की बात करने लगे शहरवासी

शिमला में देवदार के पेड़ काटने पर विवाद: बारिश में गिरने से हुआ था काफी नुकसान; ‘चिपको आंदोलन’ की बात करने लगे शहरवासी

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शिमला2 दिन पहले

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शिमला में खतरनाक बताकर काटे गए देवदार के पेड़ - Dainik Bhaskar

शिमला में खतरनाक बताकर काटे गए देवदार के पेड़

शिमला में बारिश से तबाही के बाद देवदार के पेड़ों को बड़ी संख्या में काटा जा रहा है। इस पर लोग अब सवाल खड़े कर रहे है। जिला प्रशासन पर आपदा की आड़ में गैर-जरूरी पेड़ों को काटने के आरोप लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग अब पेड़ बचाने के लिए उत्तराखंड की तर्ज पर ‘चिपको आंदोलन’ शुरू करने की बात करने लगे है।

बता दें कि उत्तराखंड में 1974 में यानी आज से 49 साल पहले पेड़ों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने चिपको आंदोलन शुरू किया था। पेड़ों को काटने से बचाने के लिए लोग उनसे चिपक जाते थे। शिमला के हालात को देखकर लोग यहां भी ऐसा करने की बात करने लगे हैं।

शिमला में खतरनाक बताकर काटे गए पेड़

शिमला में खतरनाक बताकर काटे गए पेड़

शिमला में 13 से 15 अगस्त और 22 से 24 अगस्त के बीच की भारी बारिश ने जान और माल को भारी नुकसान किया है। कई जगह तबाही का बड़ा कारण देवदार के आयु पूरा कर चुके पेड़ रहे हैं, जिनके गिरने से कई जगह घरों और गाड़ियों को नुकसान हुआ और कुछ लोगों की अकाल मृत्यु हुई।

इस बीच सुक्खू सरकार ने इस त्रासदी को स्टेट डिजास्टर घोषित किया है। इस वजह से पेड़ काटने की मंजूरी देने की शक्तियां जिला डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी जिला प्रशासन के पास आ गई है। अमूमन मेयर की अध्यक्षता में गठित ट्री-कमेटी पेड़ काटने की इजाजत देती है। स्टेट डिजास्टर के कारण जिला प्रशासन के स्तर पर पेड़ काटने की परमिशन दी जा रही है। जगह-जगह थोक में पेड़ काटे जाते है।

पूर्व डिप्टी मेयर बोले- गैर-जरूरी पेड़ न काटे जाएं
शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि खतरनाक पेड़ काटना सही है। मगर, गैर जरूरी पेड़ नहीं काटे जाने चाहिए। तबाही से बचने के लिए पेड़ काटने के बजाय इन्हें लगाने की जरूरत है। यदि 1000 पेड़ काटे जाते है, तो 5000 लगाए जाने चाहिए। लोग भी​​​​​​ ​जरूरत से ज्यादा पेड़ काटने को लेकर सवाल कर रहे हैं।

500 से ज्यादा पेड़ काटने को एप्लीकेशन
शिमला शहर में इस आपदा के बाद पेड़ों को काटने के लिए 500 से ज्यादा एप्लीकेशन आ चुकी है। खतरनाक पेड़ काटने जरूरी है। मगर, आपदा की आड़ में लोग गैर जरूरी पेड़ काटने के आरोप लगा रहे है। पर्यावरण प्रेमी इसका विरोध करने लगे हैं।

मेयर बोले- शिमला में कई गुणा ज्यादा पेड़ लगाने का टारगेट
शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि अभी पेड़ काटने की अनुमति SDM के माध्यम से हो रही है। यदि 100 पेड़ काटे जाते है तो उनका अगला टारगेट एक हजार पेड़ लगाने का है।

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