मिड-डे मील वर्कर को 5 महीने से मानदेय नहीं: हिमाचल विधानसभा का घेराव; कहा- छुट्टियां भी नहीं मिलती, इसलिए सड़कों पर उतरे

मिड-डे मील वर्कर को 5 महीने से मानदेय नहीं: हिमाचल विधानसभा का घेराव; कहा- छुट्टियां भी नहीं मिलती, इसलिए सड़कों पर उतरे

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शिमला3 घंटे पहले

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शिमला में विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करते हुए मिड डे मील वर्कर - Dainik Bhaskar

शिमला में विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करते हुए मिड डे मील वर्कर

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे मिड डे मील (MDM) वर्करों ने दोपहर बाद विधानसभा का घेराव किया। प्रदेशभर से विभिन्न मांगों को लेकर शिमला पहुंचे MDM वर्करों ने सरकार को उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है। इन्हें पांच महीने से मानदेय नहीं दिया गया।

इस दौरान व्यवस्था से प्रताड़ित MDM कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर खिलाफ नारेबाजी की। MDM वर्कर यूनियन की महासचिव हिमी देवी ने कहा कि पांच महीने से मानदेय नहीं मिलने से परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो गया है। वह बच्चों की फीस नहीं दे पा रहे।

उन्होंने कहा कि हिमाचल हाईकोर्ट के 2019 के उन आदेशों को भी लागू नहीं किया जा रहा, जिसमें हाईकोर्ट ने MDM वर्कर को 10 महीने के बजाय 12 महीने का मानदेय देने के निर्देश दिए थे।

मानदेय मात्र 3500 रुपए, वो भी 5 महीने से नहीं मिला

यूनियन की महासचिव ने बताया कि MDM वर्करों को पहले ही मात्र 3500 रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है। उसका भुगतान भी समय पर नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि MDM वर्कर को न छुटि्टयां मिलती है, न मैटरनिटी लीव दी जा रही है। इससे MDM वर्कर परेशान है।

MDM वर्कर की छंटनी रोके सरकार: भूमि देवी

हिमी देवी ने कहा कि सरकार MDM की छंटनी कर रही है। जिन स्कूलों में 25 या इससे ज्यादा बच्चे हैं, वहां पर दो MDM वर्कर है। यदि किसी स्कूल में 25 से एक दो बच्चा भी कम हो जाता है तो उस सूरत में MDM को नौकरी से हटाया जा रहा है। इससे 15 से 20 सालों तक स्कूलों में सेवाएं दे रहे MDM वर्कर बेरोजगार हो रहे हैं।

उन्होंने सरकार ने छंटनी रोकने, मानदेय जारी करने, सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर छुटि्टयां देने की मांग की है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर को कम से कम 375 की दिहाड़ी के हिसाब से मानदेय दिया जाए।

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