पंजाब-हिमाचल में बांध से अब नहीं होगी तबाही: एक्शन में सरकार; हाई पावर कमेटी गठित, सभी ​​​​​​​डैम की जांच करने व कड़ी कार्रवाई के निर्देश

पंजाब-हिमाचल में बांध से अब नहीं होगी तबाही: एक्शन में सरकार; हाई पावर कमेटी गठित, सभी ​​​​​​​डैम की जांच करने व कड़ी कार्रवाई के निर्देश

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शिमला31 मिनट पहले

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हिमाचल और पंजाब में कई इलाकों में तबाही का कारण बने बिजली परियोजनाओं के बांध प्रबंधन पर सुक्खू सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इन पर कार्रवाई के लिए सरकार ने एक्सपर्ट की हाई पावर कमेटी गठित की है। यह कमेटी राज्य में चल रहे सभी 23 बांधों का निरीक्षण करेगी। जिन प्रोजेक्ट में कमियां या अर्ली वॉर्निंग सिस्टम नहीं होगा, उस पर कमेटी सरकार से कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

दरअसल, इस मानसून में मंडी के पंडोह, कुल्लू के सैंज, कांगड़ा के फतेहपुर, जयसिंहपुर इत्यादि और पंजाब के कई क्षेत्रों में मानसून के दौरान डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़ने की वजह से तबाही हुई है। तब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के कई इलाकों में पानी भरने के बाद हिमाचल पर तंज कसते हुए कहा था कि “अब ले लो पानी’।

उन्होंने कहा कि पानी पर हिस्सा मांगने तो आ जाते हैं, लेकिन अब कोई नहीं आ रहा है। ऐसा नहीं चलेगा। इसी तरह मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिले के लोगों का भी डैम प्रबंधन के खिलाफ घुसा फूटा है और प्रभावित परिवारों ने नुकसान की भरपाई डैम प्रबधन से करने की मांग उठाई।

सरकार ने 23 कंपनियों को दिए नोटिस

इसे देखते हुए सरकार ने अगस्त के आखिरी सप्ताह में राज्य में बांध बनाकर बिजली उत्पादन कर रही 23 निजी व सरकारी कंपियों को डैम सेफ्टी एक्ट की धारा 44 के तहत लीगल नोटिस दिए थे। यह नोटिस राज्य सरकार के चार बिजली प्रोजेक्ट को भी दिए गए थे। सभी ने निर्धारित समय में इसका जवाब दिया।

नोटिस के अगले ही सूचना शेयर करने प्रोजेक्ट प्रबंधन

सरकार की इस कार्रवाई का असर यह हुआ है कि नोटिस देने के अगले ही दिन सभी कंपनियों ने सरकार को रोजाना डैम के वाटर लेवल की सूचना देनी शुरू कर दी। इसी तरह तबाही टालने के लिए जरूरी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम जैसे उपकरण लगाने शुरू कर दिए है। अब जो डैम प्रबंधन इन्हें नहीं लगाएगा, उन पर हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।

23 में से दो प्रोजेक्ट में ही अर्ली वॉर्निंग सिस्टम

सूत्रों की माने तो हिमाचल में 15 सितंबर तक 23 डैम में से दो प्रोजेक्ट में ही अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगा है, जबकि आठ जून 2014 में लारजी डैम से बिना सूचना के पानी छोड़े जाने के बाद हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्रों की मौत हो गई थी। इसके बाद सभी जल विद्युत कंपनियों को अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए थे।

मगर, 21 कंपनियों ने आज तक इन्हें नहीं लगाया। सेंट्रल वाटर कमीशन की गाइडलाइन के अनुसार, NTPC के कोलडैम और SJVNL के नाथपा झाकड़ी प्रोजेक्ट में ही अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगा है।

डैम ओवर फ्लो होने पर पानी छोड़ने से होता है नुकसान

सरकार की चिंता इस बात को लेकर है कि प्रोजेक्ट प्रबंधन ज्यादा बिजली बनाकर अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में रूटीन में पानी छोड़ने के बजाय जब डैम पूरी तरह भर जाता है, तब जाकर पानी छोड़ते है। ऐसे में जब तेज बारिश होती है तो वह तबाही का कारण बनते जाते है।

इन प्रोजेक्ट के कारण हुई तबाही

BBMB के पंडोह और पौंग डैम के कारण इस मानसून में भी काफी तबाही हुई है। बिजली बोर्ड के लारजी और गिरि नदी पर स्थित जेटो डैम भी बाढ़ का कारण बना है। भाखड़ा, चमेरा, नाथपा, कोल डैम, पार्वती और बजोली डैम भी बांध के नीचे नुकसान कर चुके हैं। वहीं मलाणा-2 के डैम के गेट अभी भी बंद पड़े हैं। BBMB के गैर जिम्मेदाराना रवैये को लेकर मुख्यमंत्री सुक्खू भी चिंता जाहिर कर चुके हैं।

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