कैग की जांच में खुलासा: पशुपालन विभाग में 95 लाख रु. गबन मामले में तीन अफसरों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी

कैग की जांच में खुलासा: पशुपालन विभाग में 95 लाख रु. गबन मामले में तीन अफसरों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी

[ad_1]

शिमला5 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

हिमाचल सरकार ने पशुपालन विभाग के तीन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की मंजूरी दे दी है। इसकी पुष्टि पशुपालन महकमे के सचिव राकेश कंवर ने की है। सरकार की मंजूरी के बाद अब विजिलेंस दो सहायक निदेशक और कैशियर के खिलाफ अदालत में चालान पेश करेगी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने 2016 से 2018 के बीच बैकयार्ड पोल्ट्री योजना, कृत्रिम गर्भाधान के आयातित सीमन फीस जमा करने और पशु चारे में गड़बड़ी की है। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने भी इन अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किए थे।

कैग की रिपोर्ट के बाद बाद विभागीय जांच में भी यह गड़बड़ी सामने आई है। शुरुआत में यह घोटाला लगभग 65 लाख रुपए का बताया जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ती गई। यह घोटाला लगभग 95 लाख रुपए का हो गया। विजिलेंस ने इस मामले की इनक्वायरी पूरी कर ली है। विजिलेंस ने नवंबर 2022 में ही राज्य सरकार से इन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी मांग ली थी। इस संबंध में विजिलेंस दो बार प्रदेश सरकार को रिमाइंडर भी भेज चुका है। बीते सप्ताह भी विजिलेंस ने सरकार को ताजा रिमांइडर भेजा था।

मामला सोलन स्थित हैड ऑफिस का है। कृत्रिम गर्भाधान के लिए आयातित सीमन की बिक्री एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में विभाग को 41.40 लाख रुपए प्राप्त हुए थे। लेकिन कैश बुक में पूरे अमाउंट की एंट्री नहीं की गई। विभाग के अधकारियों ने इसमें से 12.09 लाख रुपए सीधे लैंड डवलपमेंट बैंक में जमा किए गए, जबकि 29.31 लाख की राशि किसी भी बैंक में जमा नहीं हुए। इस पर पर्दा डालने के लिए दूसरी स्कीम के 29.31 लाख रुपए उपनिदेशक पशुपालन कार्यालय के बचत खाते से लैंड डवलपमेंट बैंक को ट्रांसफर कर दिए। इस पैसे की निकासी के कोई बिल भी रिकार्ड में नहीं हैं।

इसके अलावा पशुपालन विभाग के बैकयार्ड पोल्ट्री योजना में 10.61 लाख रुपए का गबन हुआ। लाभार्थियों की मांग पर केंद्रीय पोल्ट्री फार्म नाहन से चूजों की आपूर्ति की गई। इससे विभाद को 10.61 लाख रुपए प्राप्त हुए, लेकिन प्राप्त राशि में से 1.36 लाख रुपए की कोई रसीद जारी नहीं की गई।

गर्भित पशु आहार योजना में भी 7.20 लाख रुपए का गबन का दावा किया गया। इस योजना के तहत लाभार्थियों से 2.40 लाख रुपए 2016 से 2018 के बीच विभाग को प्राप्त हुए, लेकिन यह राशि भी बैंक व कैश बुक में एंटर नहीं की गई। इसी तरह कुछ राशि इंडसइंड और एसबीआई बैंक से विड्रा भी की गई, लेकिन कैश बुक में न तो इसकी एंट्री है और न ही कोई वाउचर मिला है। इस तरह यह लगभग 95 लाख रुपए की हेराफेरी हुई है।

पशुपालन मंत्री ने फाइल की रिकॉल
राज्य सरकार ने पशुपालन विभाग के तीनों अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी जरूर दे दी है, लेकिन अभी एक अधिकारी द्वारा पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार के समक्ष मामला उठाने के बाद संबंधित मिनिस्टर ने फाइल रीकॉल की है। अब यह फाइल पशुपालन मंत्री के कार्यालय में पेडिंग है। अब इसे देखने के बाद मंत्री अभियोजन को लेकर दोबारा निर्णय ले सकते हैं।

मंत्री की क्लीयरेंस के बाद ही विजिलेंस को अभियोजन मंजूरी के बारे में सूचित किया जाएगा। पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने बताया कि एक-दो दिन में सचिवालय आने के बाद वह अभियोजना मंजूरी की फाइल देखेंगे। उसके बाद ही इस पर कमेंट कर पाएंगे। उसके बाद विजिलेंस को इसकी जानकारी दे दी जाएगी।

सुक्खू सरकार का कड़ा संदेश: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा
आमतौर पर अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी कम ही मिलती है। इससे पहले शिमला में डीएलएफ की फॉरेस्ट में कालोनी निर्माण मामले, पूर्व वीरभद्र सरकार में बहुचर्चित इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के घोटाले, आबकारी विभाग में 12 करोड़ से अधिक के घोटाले जैसे कई मामलों में राज्य सरकार ने अभियोजन मंजूरी नहीं दी। उल्टा अधिकारियों को प्रमोशन देकर अच्छी जगह पोस्टिंग दी है।

इससे विजिलेंस कई मामलों में चाहकर भी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाया। लेकिन सुक्खू सरकार ने पशुपालन विभाग के घपले में अभियोजन मंजूरी देकर भ्रष्टाचार के प्रति अपने रवैये का स्पष्ट संकेत दे दिया है। वह कह चुके हैं भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।

खबरें और भी हैं…

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *